जिम्मेदार कौन

by lav
Inspired by: "Express Yourself"
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जिम्मेदार कौन

झेल रहे है गुलामी , झेल रहे मुसीबत

खेल रहे ज़िंदगी से, ये कैसी जुर्रत

ना’,कह ना पाते, गलत आदेश को

चाहे करे खिलवाड़ जीवन से, किसको पड़ी जरूरत

क्यो हर शक्स है, अपनी लाचारी पे मौन

जिम्मेदार कौन..1.

 

कौन ये सवाल  अपने आप से,

कौन ये जवाब नहीं   इस हिसाब से

के जिम्मेदारी  बनती तब

जब पता रहे  क्या गलत है  सही है

क्या कोई पूछता है अपने आप से

पुछे भी कैसे  जब उसको  आत्म बोध ही नहीं

पता तो रहे  वो खुद है कौन…2.

 

हालात बने है ऐसे

कोई करे तो, करे क्या कैसे

कभी सांस लेना भी अपने बस मे नहीं

वो किसी और से पूछे कैसे

हर व्यक्ति घिरा हुआ अपने आप मे

कैसे कहे के वो किस हालत मे

खुद ही फसा या फसाया गया

ना जाने कि बिसात मे

क्या ज़िम्मेदारी किसी और की नहीं

जो दे सहारे उसे मजधार मे

क्या करे जब सभी डूब रहे उसी धार मे

तो   संभालेगा कौन...3.

 

क्या कोई है जो आसमान से आयेगा,

क्या कोई है जो जिंदगी बचाएगा।

कौन है वो जो लड़ेगा मेरे लिए,

कौन मेरे लिए अपना खून बहाएगा।

देखा चारो ओर,

देखा धरती और शोर,

देखा दूसरी दुनिया,

दिख ना पाया कोई छोर।

पर ना देख पाया वाहा,

जहा सब राज़ दफन थे।

या देखना चाहता ही नहीं,

शायद वो ही मेरे कफन थे।

खुद को खोजने की हिम्मत नहीं,

खुद को जान ले और  जौहमत नहीं।

और खोज रहा पुछकर , कौन ?..4..

 

की जिम्मेदार वो है जिसने दुनिया बनाया,

या वो जिन्होने जीना सिखाया,

या उसे कहे जो साथ है,

या वो है जो अब ना रहे,

या वो जो रहे ही नहीं,

अपने आप से तो कभी पूछा ही नहीं।

पूछ लो कभी अपने आप से भी,

या देख लिया करो आईने अनायास यू ही

के इस सुंदर धरती पर हमे लाया किसने

इस सुंदर धरती को बिगड़ा किसने

अब इसकी सुंदरता जो बिगड़ चुकी मेरे स्वार्थ से

इस सुंदरता को निखरेगा कौन…5..

 

मृतक के समान पड़े है धरती पर

सूखे वृक्ष से खड़े है धरती पर

धूम रहे अरबों कीड़े जिस तरह

ना जाने किस चाह मे पड़े धरती पर

की धरती माता भी बोझ मन चुकी जिस

इंसान लगा नोचने , दोष मड़ चुका इसी धरती पर

जीवन की परिभाषा यही धरती है,

सांस लेना बस जिंदगी नहीं है।

साँसे मिली है अगर तो लूटा दो इसे इस धरती पर

पर भी ना पुछना कभी सँवरेगा कौन…6..

 

दोष मडटे रहे हम  औरों पर  ज़िदगी भर

क्या खुद से पूछा हमने इस कदर

मुझ से ही सुरू ये कहानी,

मुझ से ही खतम हुआ मेरा सफर।

किसी और के लिए इसमे क्या जगह है,

क्या ये खुदगरजी है या कोई और वजह है।

अब तो मन नहीं अब ना पुछू कौन।…7..

 

 

के साथ नहीं कोई जब जरूरत है सब की,

बस ज़िम्मेदारी थी मेरी सिर्फ मेरी जब की।

ज़िम्मेदारी है मेरी ये जब समझ आया

ज़िम्मेदारी है मेरी ये बात सभी को बतलाया

ज़िम्मेदारी है सिर्फ मेरी ये सभी को समझनी है

ज़िम्मेदारी पुछने मे कोई देर नहीं करनी है

जिम्मेदार मै हु जो पूछता नहीं सवाल

जिम्मेदार मै हु जो हो जाता हु बेहाल

मै ही हु जिसको आदत है सहने की

ना सोची जरूरत किसी से कहने की

वो भी उसी कस्मकस से जूझ रहा जहा मै हु

क्या मेरी ज़िम्मेदारी नहीं उससे कहने की

संवाद साध कर, 'वहम' उसके हरने की?

ना पूछ कर मै खुद मे घुट रहा

वो सब ना बता कर भी हसते रहे

सब हो रहा अब भी उसी तौर

जिम्मेदार कौन।…8..

जिम्मेदार कौन ?

 

                      कमल क्षत्री

                 दिनांक: 12-11-2025

                 स्थान : फूसरो, बोकारो

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